सिकंदराराऊ। नगर के मोहल्ला नगला शीशगर स्थित सिद्ध पीठ पथवारी माता मंदिर पर शारदीय नवरात्र महोत्सव के अवसर पर देवी भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित सुभाष चंद्र दीक्षित ने माता रानी के दिव्य स्वरूपों और देवी भागवत के महात्म्य का वर्णन किया।
आचार्य सुभाष चंद्र दीक्षित ने कहा कि मां जगत जननी के प्रत्येक स्वरूप का विशेष महत्व है। मां आदिशक्ति अपने विभिन्न स्वरूपों में भक्तों का कल्याण करती हैं। जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा, तब-तब माता ने असुरों का संहार करने के लिए शस्त्र उठाए। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म के मार्ग पर चलने और माता रानी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कथा के दौरान आचार्य ने राजा परीक्षित और उनके पुत्र राजा जन्मेजय के प्रसंग के माध्यम से कल्प भेद और देवी भागवत के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि भगवती की लीलाएं विभिन्न कल्पों में अलग-अलग स्वरूपों में प्रकट होती हैं। इसके साथ ही उन्होंने भगवती को समस्त चराचर जगत का मूल तत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को अहंकार त्यागने और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
आचार्य ने कहा कि भक्ति केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण है। उनके भजनों और भावपूर्ण प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। पूरा कथा पंडाल माता रानी के जयकारों से गूंज उठा।
कथा के प्रथम दिन मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर धर्मेंद्र शर्मा, चेतन शर्मा, वीरो लाला, दुर्गेश शास्त्री, पूसाराम शर्मा, जगदीश कश्यप और विनय शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।










