हाथरस में सरकारी विद्यालयों की बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर अब जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाई है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक ह्यूमन राइट्स यानी एडीएचआर की पहल के बाद जिलाधिकारी अतुल वत्स के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
दरअसल, एडीएचआर के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय और जिलाध्यक्ष कमलकांत दोवराबाल ने 27 अगस्त को सरकारी विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर जिलाधिकारी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद बीएसए ने 1 सितंबर को जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर विद्यालयों में व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से दुरुस्त कराने और कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इन निर्देशों में 18 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें स्वच्छ पेयजल, क्रियाशील शौचालय, जर्जर भवनों का सर्वेक्षण, पर्याप्त और सुरक्षित कक्षाएं, बच्चों के लिए फर्नीचर, खेल मैदान, पर्याप्त शिक्षक, पौष्टिक मध्यान्ह भोजन, ड्रेस और शैक्षिक सामग्री, बिजली-पंखे और प्रकाश व्यवस्था प्रमुख हैं।
इसके अलावा विद्यालय परिसर की स्वच्छता, बालिकाओं के लिए विशेष सुविधाएं, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुगम आवागमन, नियमित निरीक्षण, सार्वजनिक रिपोर्टिंग, शिकायत एवं निगरानी व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा व गरिमा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एडीएचआर का कहना है कि शिक्षा का अधिकार सिर्फ स्कूल में प्रवेश तक सीमित नहीं है। हर बच्चे को सुरक्षित भवन, स्वच्छ पानी, शौचालय, पर्याप्त शिक्षक, फर्नीचर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना उसका अधिकार है।
एडीएचआर ने जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई का स्वागत किया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी अधिकारी या विभाग की आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं दिलाना है।
अब जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों की है। देखना होगा कि सरकारी विद्यालयों की कमियां सिर्फ कागजों पर चिन्हित होती हैं या फिर इन 18 बिंदुओं पर धरातल पर भी बदलाव दिखाई देता है।
एडीएचआर का साफ संदेश है—कोई भी सरकारी विद्यालय बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे और कोई भी बच्चा गरीबी या सरकारी स्कूल में पढ़ने के कारण गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और गरिमापूर्ण शिक्षा से वंचित न हो।










