हाथरस। जनपद न्यायालय, हाथरस में न्यायिक अधिकारियों के सतत सीखने और कानूनी ज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष जानकारी सत्र आयोजित किया गया। जे.टी.आर.आई. लखनऊ के निर्देशानुसार और जनपद न्यायाधीश विनय कुमार-तृतीय की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन जनपद न्यायालय परिसर स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम में किया गया। इस दौरान अपर जनपद न्यायाधीश विजय कुमार-द्वितीय ने न्यायिक अधिकारियों को उत्तराधिकार से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम मुख्य रूप से ईसाई, पारसी और यहूदी समुदायों के उत्तराधिकार को विनियमित करता है। वहीं, हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए वसीयत से संबंधित नियम इस अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, जबकि बिना वसीयत के मृत्यु होने पर सामान्यतः हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधान लागू होते हैं। मुस्लिम समुदाय के मामलों में उनके व्यक्तिगत कानून प्रभावी होते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत अदालतों द्वारा प्रोबेट यानी वसीयत की प्रामाणिकता का न्यायिक प्रमाण-पत्र और उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इन प्रमाण-पत्रों के माध्यम से बैंक खातों और अन्य संपत्तियों को कानूनी वारिसों के नाम हस्तांतरित कराने में सहायता मिलती है।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय विजय कुमार डुंगराकोटी, अपर जनपद न्यायाधीश संगीता शर्मा, हर्ष अग्रवाल, शैलेन्द्र सिंह, ईश्वर सिंह, बुशरा आदिल रिजवी, महेन्द्र कुमार रावत, प्रशान्त कुमार, जयहिन्द कुमार सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज कुमार मिश्रा, सिविल जज आकांक्षा गर्ग, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपकनाथ सरस्वती, सादाबाद की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आकांक्षा तिवारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी, सिविल जज एवं त्वरित न्यायालय की ईशा अग्रवाल सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।










