सिकंद्राराऊ में कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन,कवियों ने रचनाओं से बांधा सम

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सिकंदराराऊ। नगर के प्राचीन आश्रम श्री रामबाग परिसर में कर्मयोग सेवा संघ के तत्वावधान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संघ के अध्यक्ष विवेकशील राघव ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीगढ़ से पधारे वरिष्ठ कवि ललित सिंह ललित ने की, जबकि मंच का संचालन हास्य कवि प्रमोद विषधर ने किया। कार्यक्रम का संयोजन एटा की वरिष्ठ कवयित्री चंद्रेश जैन, कवि पंकज पंडा और कवि शिव संभव ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी भावना दीदी रहीं।

कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न जनपदों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर किया। मथुरा से आए कवि आचार्य निर्मल ने मां की ममता पर पंक्तियां पढ़ते हुए कहा, “मां की ममता देखकर, रुक जाते हैं पांव, मां के आंचल में मिले, शीतल, निर्मल छांव।” हाथरस के कवि वीरेंद्र पाठक ने अपनी भावपूर्ण रचना “आप आये नहीं और सुबह हो गई, मेरी पूजा की थाली धरी रह गई” सुनाकर खूब सराहना बटोरी।

अलीगढ़ के कवि अभय सिंह अभय ने मां के प्रति भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “मां की चाह पुकार रही, तुमने कब ये जाना है, वो बैठी मन मार रही, तुमने कब ये जाना है।” वहीं, कवयित्री चंद्रेश जैन ने प्रेम की भावनाओं को अपनी पंक्तियों में पिरोते हुए कहा, “प्यार की दृग धारा कहीं कम नहीं हो जाय, आंखों में आजा, सपना कहीं टूट न जाए।”

मथुरा से आए कवि डॉ. दिनेश कुमार पुरी ने मेहनत और दृढ़ संकल्प पर आधारित रचना “मैंने आंखों में सपने पाले, मंजिल मेरी करीब है, कसर न छोड़ूंगा मेहनत में, बदलना मुझे नसीब है” सुनाकर श्रोताओं में उत्साह भर दिया। कवि कुमार संभव ने मां के स्नेह को अपनी रचना में व्यक्त करते हुए कहा, “झूठा गुस्सा वो यार करती है, प्यार भी बेशुमार करती है, घर से बाहर कहीं चला जाऊं, मां मेरा इंतजार करती है।”

लखीमपुर खीरी से आए कवि धीरू वर्मा ने सामाजिक परिस्थितियों पर व्यंग्य करते हुए कहा, “सबकुछ छल-कपट से पाना चाहती है दुनिया, हमने मंथरा को कैकेयी के कान भरते देखा है।” वहीं, कार्यक्रम आयोजक विवेकशील राघव ने अपनी रचना “इतना तपा दिए हैं कि ढलते चले गए, जाना नहीं कहीं भी, चलते चले गए” सुनाकर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।

सम्मेलन में हास्य कवि पंकज पंडा, डॉ. उदयवीर सिंह एटा, देवेंद्र दीक्षित शूल, डॉ. ललित कुमार सिंह और आगरा के संजय कुमार सहित अन्य कवियों ने भी काव्यपाठ किया। कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया और पूरे कार्यक्रम में साहित्यिक वातावरण बना रहा।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक विवेकशील राघव एवं कर्मयोग सेवा संघ के पदाधिकारियों ने सभी साहित्यकारों का अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। साथ ही कार्यक्रम में सहभागिता के लिए सभी अतिथियों और कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संतोष पुंढीर, नरेश राघव, नागेंद्र राणा, मुकेश बघेल, सुमित सिसौदिया, वैष्णव शर्मा, राजेश यादव, जितेंद्र यादव, मोनू ठाकुर, संजीव पुंढीर, अभय प्रताप और अनंत प्रताप सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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