हाथरस जनपद न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों के सतत ज्ञानवर्धन और नवीनतम कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण विधिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जे.टी.आर.आई. लखनऊ के निर्देशानुसार और जनपद न्यायाधीश विनय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में जनपद के समस्त न्यायिक अधिकारी शामिल हुए।
कार्यशाला में सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग एवं त्वरित न्यायालय ईशा अग्रवाल ने मुख्य वक्ता के रूप में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में जारी नवीनतम आदेशों, महत्वपूर्ण निर्णयों और कानूनी सिद्धांतों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान न्यायालयों में नवीनतम नजीरों के प्रभावी क्रियान्वयन, लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण, न्यायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने को लेकर मंथन किया गया।
इसके साथ ही डिजिटल साक्ष्यों के प्रबंधन, नई विधिक तकनीकों और ई-कोर्ट प्रणाली के बेहतर इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
जनपद न्यायाधीश विनय कुमार ने कहा कि कानून एक गतिशील विषय है और न्याय की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक न्यायिक अधिकारी का नवीनतम न्यायिक निर्णयों से अपडेट रहना बेहद जरूरी है।
वहीं, जनपद न्यायालय में चल रही तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत में भी 24 लघु आपराधिक वादों का निस्तारण किया गया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपकनाथ सरस्वती के न्यायालय से सबसे अधिक 15 वादों का निस्तारण हुआ। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों द्वारा भी लघु आपराधिक वादों का निस्तारण किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनु चौधरी ने बताया कि 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर शमनीय वाद, दीवानी और राजस्व वाद, मोटर दुर्घटना वाद, पारिवारिक विवाद, बैंक वसूली, एनआई एक्ट की धारा 138, विद्युत चोरी, वाटर टैक्स और जलकर सहित विभिन्न मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाते हुए अपने मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराएं।
लोक अदालत में मामलों के निस्तारण से समय और धन दोनों की बचत होती है और आपसी सहमति से विवाद का समाधान होने के कारण दोनों पक्षों की जीत होती है।










