सिकन्द्राराऊ।उत्तर प्रदेश में निबंधन (रजिस्ट्री) कार्यालयों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों का आंदोलन शुक्रवार को दसवें दिन भी सिकंदराराऊ में जारी रहा। तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर आंदोलनकारियों ने सरकार के प्रस्तावित निर्णय का विरोध जताते हुए निबंधन विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल वापस लेने की मांग की।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निबंधन विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विभाग है। जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील कार्यों को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि निजीकरण लागू होने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, वहीं अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं एवं टाइपिस्टों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
आंदोलनकारियों ने सरकार से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा।
धरनास्थल पर वक्ताओं ने बताया कि आंदोलन की आवाज शासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई जा रही है। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), भारतीय किसान यूनियन (भानु) तथा पूर्व एमएलसी राकेश राणा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय से मुलाकात कर निबंधन विभाग के निजीकरण से होने वाली समस्याओं से अवगत कराया। नेता प्रतिपक्ष ने इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाने का आश्वासन दिया है।
धरने की अध्यक्षता बार एसोसिएशन अध्यक्ष डी.के. चौहान (शोला) ने की, जबकि संचालन अधिवक्ता जय प्रकाश गुप्ता ने किया। इस दौरान बार एसोसिएशन सचिव राजेश बघेल, सिविल एसोसिएशन अध्यक्ष कुलदीप कुमार पंढीर, मीडिया प्रभारी प्रियांशु दरगढ़ सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कातिब, स्टाम्प विक्रेता एवं टाइपिस्ट उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि निबंधन विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव वापस होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।









