कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विवेक उपाध्याय को बीती रात हाउस अरेस्ट कर लिया गया। पुलिस ने यह कार्रवाई किसी भी संभावित विरोध प्रदर्शन की आशंका के चलते की। रात भर पुलिसकर्मी उनके आवास पर मौजूद रहे।
विवेक उपाध्याय के मुताबिक उन्होंने सासनी कोतवाली प्रभारी विपिन चौधरी से फोन पर बात कर उन्हें रोके जाने का कारण और कार्रवाई का आधार पूछा। उपाध्याय के अनुसार, उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। प्रभारी ने केवल इतना कहा कि पुलिस ‘नॉर्मल तरीके से मिलने’ के लिए भेजी गई है।
उपाध्याय ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह सिर्फ एक सामान्य मुलाकात थी, तो रात भर पुलिस बल की मौजूदगी किस बात का संकेत है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि क्या लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज उठाना अब अपराध बन चुका है और क्या जनता की समस्याओं को उठाने वाले नेताओं को इस तरह मानसिक दबाव में रखने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने बताया कि वह लगातार जनता के मुद्दों जैसे बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक, प्रदूषण, किसानों और युवाओं की समस्याओं को मजबूती से उठाते रहे हैं। उपाध्याय का मानना है कि शायद यही बात सत्ता और प्रशासन को असहज कर रही है।
उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का हर प्रयास जनता खुद जवाब देकर विफल करेगी। उन्होंने प्रशासन से बिना आदेश, बिना कारण और बिना कानूनी प्रक्रिया के विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने पर सवाल उठाया और कारण या आदेश सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र संविधान से चलता है, डर और दबाव से नहीं।









