सिकंद्राराऊ।पत्रकारिता सिर्फ खबरों को कैमरे में कैद करने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरत के समय समाज के साथ खड़े होने की जिम्मेदारी भी है। सिकंद्राराऊ में हाथरस24 के पत्रकार मोहित कुमार उर्फ मोनू ने सड़क हादसे में घायल युवक की मदद कर पत्रकारिता के साथ इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
मामला सिकंद्राराऊ थाना क्षेत्र के अलीगढ़ रोड स्थित KGN कॉलेज के पास का है। सोमवार रात करीब 10 बजे करीमनगर निवासी सोहेल पुत्र सलीम मोटरसाइकिल से अलीगढ़ की ओर जा रहा था। KGN कॉलेज के पास सड़क पर खड़े एक वाहन से उसकी बाइक टकरा गई। हादसे में सोहेल सड़क पर गिर गया और उसके सिर व मुंह में गंभीर चोटें आईं। घायल के शरीर से काफी खून बह रहा था।
हादसे की सूचना मिलने पर Hathras24 के सिकंदराराऊ संवाददाता मोहित कुमार उर्फ मोनू मौके पर पहुंचे। सामने गंभीर रूप से घायल युवक को देखकर उन्होंने सबसे पहले उसकी मदद करने का फैसला लिया। एंबुलेंस के इंतजार में समय गंवाने के बजाय मोहित ने घायल युवक को अपने कंधे पर उठाया और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उसका उपचार शुरू कराया गया।
मोहित ने बताया कि मौके पर पहुंचने के बाद उनके सामने दो विकल्प थे—पहले हादसे की तस्वीर बनाकर खबर तैयार करना या फिर तत्काल घायल की मदद करना। उन्होंने बिना देर किए इंसानियत को प्राथमिकता दी। घायल युवक के सिर और मुंह से लगातार खून बह रहा था, जिसके कारण मोहित के कपड़े भी खून से सन गए, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना युवक को अस्पताल पहुंचाना जरूरी समझा।
मोहित कुमार का कहना है कि पत्रकार का काम सिर्फ समाज की समस्याओं को सामने लाना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर समाज के बीच खड़े होकर जिम्मेदारी निभाना भी है। उन्होंने कहा कि किसी की जान बचाने से बड़ा कोई समाचार नहीं हो सकता।
मोहित कुमार का यह कदम समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि सड़क हादसे या किसी आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को तमाशबीन बनकर देखने के बजाय उसकी तत्काल मदद करनी चाहिए। कई बार समय पर अस्पताल पहुंचना किसी घायल की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
पत्रकार मोहित कुमार की इस मानवीय पहल की स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि पत्रकारिता जब संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और इंसानियत से जुड़ती है, तो वह समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत आवाज बन जाती है।
यह घटना एक बार फिर संदेश देती है कि कैमरा और कलम से समाज की आवाज उठाने वाला पत्रकार जब जरूरत के समय इंसानियत का हाथ बढ़ाता है, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।










