हाथरस में अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने नई पहल शुरू की है। लगातार घटते अरहर के रकबे को बढ़ाने और किसानों की आय में इजाफा करने के उद्देश्य से चयनित किसानों के खेतों पर अरहर उत्पादन का परीक्षण किया जा रहा है।
भारत को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, हाथरस द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में चयनित किसानों के खेतों पर अरहर की फसल का परीक्षण किया जा रहा है।
आईसीएआर-अटारी कानपुर जोन-3 और केवीके प्रभारी डॉ. एस.आर. सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए डॉ. बलवीर सिंह लगातार किसानों के बीच पहुंच रहे हैं।
डॉ. बलवीर सिंह अमृतपाल के साथ गांव-गांव जाकर अरहर की फसल का निरीक्षण और सघन मूल्यांकन कर रहे हैं। इस दौरान किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
किसानों को बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक तकनीकों के सही इस्तेमाल से अरहर की उत्पादकता और खेती का रकबा बढ़ाया जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी में भी बढ़ोतरी होगी।
डॉ. बलवीर सिंह के लगातार खेतों तक पहुंचने और किसानों से सीधे संवाद करने का असर भी दिखाई दे रहा है। किसानों में अरहर की खेती को लेकर उत्साह बढ़ा है और फसल के प्रति नया रुझान देखने को मिल रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल अगर सफल होती है तो न सिर्फ हाथरस में अरहर का रकबा बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि दलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।










