एडीएचआर के तत्वावधान में पुलवामा में शहिद हुए सैनिकों की स्मृति में भव्य रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन

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एडीएचआर के तत्वावधान में पुलवामा में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
यह शिविर पुलवामा आतंकी हमले में शहीद वीर जवानों को समर्पित रहा। शिविर का मूल मंत्र था — रक्तदान, जीवनदान, महादान।

शिविर में रक्तदानियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और मानवता के इस महाकुंभ को सफल बनाया। डॉ. भरत यादव ने कहा कि यह रक्तदान शिविर पुलवामा के शहीद सैनिकों को समर्पित है। रक्तदान वह महादान है जो मृत्यु से संघर्ष कर रहे व्यक्ति को जीवन देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि एडीएचआर का उद्देश्य है कि रक्त की कमी से किसी भी व्यक्ति की जान न जाए — यही सच्ची सेवा और ईश्वरीय कार्य है।

राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन वार्ष्णेय ने कहा कि यह समय सनातन संस्कृति के उन्नयन का है। हमारी संस्कृति हर पल मानवता और प्रेम की प्रेरणा देती है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता देवेंद्र गोयल ने बताया कि रक्त की एक यूनिट चार लोगों की जान बचा सकती है। रक्तदानी ईश्वर द्वारा दिए गए जीवन को बचाने का माध्यम बनता है।

जिलाध्यक्ष कमलकांत दोबरावाल ने पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को शत-शत नमन।
महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष सोनल अग्रवाल ने कहा कि हम वीर जवानों का ऋण कभी नहीं चुका सकते, लेकिन उनके बलिदान को याद कर मानवता की सेवा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
शिविर में विशेष उत्साह देखने को मिला। कुल 30 रक्तदानियों ने रक्तदान कर जीवन बचाने का संकल्प लिया। पति-पत्नी, भाई-भाई, मित्र, पिता-पुत्र, मां-पुत्री सहित समाज के विभिन्न वर्गों और पत्रकार साथियों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
इस अवसर पर राजीव अग्निहोत्री, शैलेन्द्र साँवलिया, बाल प्रकाश वार्ष्णेय, इन्द्रेश चौधरी, राजेश वार्ष्णेय, कौशल किशोर गुप्ता, आयुष अग्रवाल, अमन बंसल, जितिन तरैटिया, संदीप गुप्ता, श्याम वार्ष्णेय, राम वार्ष्णेय, पुनीत अग्रवाल, राकेश अग्रवाल, कविता गोयल, प्रेमवदा गर्ग, प्रभा वार्ष्णेय सहित अनेक लोगों का सराहनीय योगदान रहा।
मानवता और राष्ट्रभक्ति के इस संगम ने एक बार फिर साबित किया कि रक्तदान ही सच्चा जीवनदान है।

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