सासनी के बसंत विहार कॉलोनी में महाशिवरात्रि के अवसर पर ‘कवियों की एक शाम भोले बाबा के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता राजेश कुमार शर्मा ने की, जबकि अवकाश प्राप्त अध्यापक एवं कवि महेंद्र पाल सिंह ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के छवि चित्र पर अध्यक्ष राजेश कुमार शर्मा द्वारा माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद वीरेन्द्र जैन नारद ने सरस्वती वंदना का सस्वर पाठ किया और अपनी भावपूर्ण कविता ‘यह दुनिया एक तमाशा है, कभी तोला है कभी माशा है’ प्रस्तुत की। उन्होंने भोले बाबा को समर्पित अपनी रचना ‘शिव भोले भंडारी, तेरी महिमा जग से न्यारी’ भी सुनाई।
कवि अशोक मिश्रा ने भ्रूण हत्या जैसे गंभीर विषय पर अपनी कविता सुनाई, ‘एक अजन्मी बेटी ने मां को खत में लिखवाया, कांप उठी हूं जब से तुमने अल्ट्रासाउंड करवाया।’ कवि एमपी सिंह ने बेटी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘अभिशाप नहीं वरदान है बेटी, बेटी घर की शान, जिस घर में ना जन्म ले बेटी, वो घर नर्क समान।’
हास्य कवि वीरपाल सिंह ‘वीर’ ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को गुदगुदाया, ‘कैसौ जमानौ आयौ हाय राम दैया, साली के आगे अपनी भूल जाय लुगैया।’ कवि रविराज सिंह ने समाज को जगाने का संदेश दिया, ‘सदियों तक तुम सोते रहे अब तो जागो भाई, अब भी नहीं जगे तो जग में होगी बहुत हंसाई।’
सचिन पाठक ने प्रेम और निरंतरता पर अपनी रचना प्रस्तुत की, ‘आप आते रहें हम बुलाते रहें, सिलसिला प्यार का यूं ही चलता रहे, छू न पाए किसी को भी पतझड़ यहां, मोहब्बत का गुलशन यूं खिलता रहे।’ गौरव शर्मा ने यादों और सपनों को काव्यबद्ध किया, ‘यादों के खंडहर में अक्सर सपनों के महल बनाते हैं, आंसू की सरगम पर हम तो गीत वफा के गाते हैं।’
राजेश कुमार शर्मा ने रस परिवर्तन करते हुए अपनी कविता सुनाई, ‘दिल के सूने साज पर कोई गीत न गाया जाएगा, इन आंखों में आखिर कब तक दर्द छुपाया जाएगा।’ इसके बाद अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ ही कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया गया।









