हाथरस।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निबंधन कार्यालयों के कार्यों को निजी कंपनी को सौंपे जाने के प्रस्ताव के विरोध में सिकंदराराऊ में अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों का आक्रोश फूट पड़ा। उप-पंजीयक कार्यालय परिसर में विभिन्न संगठनों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल का ऐलान कर दिया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार प्रस्ताव वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। देखिए ये रिपोर्ट।
वीओ :सिकंदराराऊ स्थित उप-पंजीयक कार्यालय पर बुधवार को अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों ने एकजुट होकर सरकार के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव के विरोध में विशाल धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान सभी संगठनों ने कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी।
धरने की अध्यक्षता डी.के. सिंह ‘शोला’ एडवोकेट ने की। कार्यक्रम में दि बार एसोसिएशन, सिविल बार एसोसिएशन, कातिब एसोसिएशन, स्टाम्प विक्रेता एसोसिएशन और टाइपिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि निबंधन विभाग के कार्यों का निजीकरण अधिवक्ताओं, कातिबों, स्टाम्प विक्रेताओं और टाइपिस्टों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि इस फैसले से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.के. सिंह ‘शोला’, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पुंडीर, बार एसोसिएशन के सचिव राजेश बघेल तथा सिविल बार एसोसिएशन के सचिव जितेन्द्र यादव समेत अन्य वक्ताओं ने सरकार से प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की।
धरने के उपरांत सभी संगठनों ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया कि जब तक निबंधन कार्यालयों के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के हितों की नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता, गरिमा और जनहित की रक्षा से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।







