हाथरस। श्री दाऊजी महाराज के 115वें राजकीय मेले के तहत शुक्रवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष अनंत चतुर्दशी के अवसर पर महाविष्णु यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद श्री वेद भगवान की परावर्तन यात्रा का आयोजन किया गया।
गुरुवार से आचार्य बागीषदत्त गौड़, आचार्य संतोष मुखिया, ज्योतिषाचार्य विश्वनाथ पुरोहित, पंडित राघव वशिष्ठ सहित विद्वानों के सहयोग से विष्णु यज्ञ का आयोजन किया जा रहा था। शुक्रवार को विधि-विधान के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई।
इसके बाद गणपति गणेश और चारों वेदों को रथ में विराजमान कर बैंड-बाजों के साथ परावर्तन यात्रा निकाली गई। यात्रा के दौरान विद्वानों और श्रद्धालुओं ने श्री वेद भगवान के जयकारे, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो जैसे जयघोष किए।
परावर्तन यात्रा मेला क्षेत्र के प्रमुख बाजारों से होकर गुजरी। रास्ते में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने आरती उतारी, प्रसाद वितरित किया और गणपति गणेश व चारों वेदों पर पुष्पवर्षा की।
यात्रा के दौरान कामेश्वर नाथ मंदिर पर पूजन-अर्चन और आरती-वंदन किया गया। विद्वानों द्वारा विधि-विधान से सभी देवी-देवताओं, गणपति गणेश और चारों वेदों को अपने-अपने स्थान पर प्रस्थान करने का आह्वान किया गया।
वेद भगवान शिविर में पंडित सत्येंद्र स्वरूप शर्मा और इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा ने उपस्थित भक्तजनों का पीत पटका पहनाकर स्वागत किया। विशिष्ट जनों को श्री वेद भगवान का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
आचार्यों को यथायोग्य दक्षिणा दी गई और भक्तजनों को प्रसाद व प्रतीकात्मक भेंट प्रदान की गई। पुरानी परंपरा के अनुसार गणेश चतुर्थी पर श्री वेद भगवान की शोभायात्रा से मेले का शुभारंभ और अनंत चतुर्दशी पर परावर्तन यात्रा के साथ धार्मिक अनुष्ठान का समापन माना जाता है।
श्राद्ध पक्ष शुरू होने के कारण परंपरा के अनुसार अनंत चतुर्दशी के बाद सभी देवी-देवताओं को अपने-अपने स्थान पर प्रस्थान कराया जाता है।










