हाथरस। राजनीति अक्सर सत्ता और पद तक सीमित मानी जाती है, लेकिन हाथरस में एक ऐसा उदाहरण सामने आया है जो इस सोच को नई दिशा देता है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विवेक उपाध्याय ने मरणोपरांत अपना पूरा शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए दान करने का संकल्प लेकर सामाजिक सरोकार की एक मिसाल पेश की है।
उन्होंने इस संबंध में जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, ए.एम.यू., अलीगढ़ को औपचारिक इच्छापत्र भेज दिया है। खास बात यह है कि यह निर्णय उन्होंने पूरी तरह स्वेच्छा, स्वस्थ मस्तिष्क और परिवार की सहमति के साथ लिया है।
विवेक उपाध्याय का कहना है कि “राजनीति का असली उद्देश्य समाज की सेवा होना चाहिए। जब तक जीवन है, तब तक लोगों के लिए काम करें और मृत्यु के बाद भी मानवता के काम आएं—यही सच्ची सेवा है।” उनका यह बयान केवल शब्द नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी है।
देश में चिकित्सा शिक्षा के लिए मानव शरीर की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में देहदान जैसे निर्णय न केवल मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर देते हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में भी मददगार साबित होते हैं। इसके बावजूद समाज में अभी भी इस विषय को लेकर झिझक और जागरूकता की कमी देखने को मिलती है।
विवेक उपाध्याय ने लोगों से अपील की है कि वे देहदान जैसे पुण्य कार्य के प्रति जागरूक हों और आगे आएं। उनका यह कदम न सिर्फ एक व्यक्तिगत संकल्प है, बल्कि समाज को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल भी है।
हाथरस में उनके इस फैसले की हर ओर सराहना हो रही है। लोग इसे एक ऐसे उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जो बताता है कि असली नेतृत्व वही है जो समाज के लिए जीता है और जरूरत पड़े तो मृत्यु के बाद भी मानवता के काम आता है।









