सादाबाद के समीपवर्ती गांव पोदा में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इन दिनों यह भागवत कथा दूरदराज से आए भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रख्यात कथावाचक कन्हैयालाल ने अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
कथावाचक कन्हैयालाल आचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि, कलियुग में मनुष्य को अपना जीवन कैसे जीना है, उसके लिए जीवन की राह बताई।
मनुष्य जीवन केवल सांसारिक उपभोग के लिए नहीं है। उन्होंने पाप कर्मों का त्याग कर, मांस मदिरा त्याग, सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि भागवत कथा समाज में नैतिकता और धर्म के साथ जीवन जीने की दिशा प्रदान करती है।
आचार्य कन्हैयालाल ने रुक्मिणी विवाह के आध्यात्मिक रहस्य को समझाया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप हैं। और उनका भगवान से मिलना जीवात्मा का परमात्मा से मिलन है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और जीवंत वर्णन किया।
विवाह की सुंदर झांकियों ने सभी का मन मोह लिया, जिसके बाद पांडाल में मौजूद श्रद्धालु ‘जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष करने लगे।
व्यास पीठ से आचार्य कन्हैयालाल जी ने जब रूखमणि विवाह पर भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी, तो पांडाल में मौजूद महिलाएं, पुरुष, बच्चे और साधु-संत भी भावविभोर होकर नाचने लगे। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय भजनों और नृत्य से सराबोर हो गया।
कथा के दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रीय भक्तों और साधु-संतों की उपस्थिति ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। रुक्मिणी विवाह के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई, जिससे उत्सव जैसा माहौल बन गया।







