अधिकारी से अध्यापक और फिर छात्र बने हाथरस डीएम हाथरस अतुल वत्स

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हाथरस से सोमवार को ऐसा मन छू लेने वाला दृश्य सामने आया, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था में व्यस्त रहने वाले अधिकारियों के प्रति लोगों की सोच को ही बदल दिया।

जिलाधिकारी हाथरस अतुल वत्स के द्वारा विकास खण्ड सासनी क्षेत्र दयान्तपुर गांव में स्थित सिविलियन विद्यालय का किए गए आकस्मिक निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसा किया, जिसने बच्चों और शिक्षकों को भावुक करने के साथ-साथ प्रेरित भी किया। निरीक्षण के दौरान जब डीएम एक कक्षा में पहुँचे, तो शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही थीं। क्लासरूम के सकारात्मक माहौल को देखकर डीएम खुद को रोक नहीं पाए और एक खाली बेंच पर जाकर बच्चों के बीच बैठ गए। बच्चों ने जब जिलाधिकारी को अपने बीच पाया तो उनके चेहरे खिल उठे। वे उत्साह से भर गए और उनसे सहजता से बातचीत करने लगे।

इस दौरान डीएम भी बिल्कुल छात्र की तरह मुस्कुराते हुए उनके सवालों के जवाब देते रहे। करीब 20 मिनट तक डीएम हाथरस अतुल वत्स ने बच्चों की कॉपियाँ चेक करने के साथ ही उनकी पढ़ाई संबंधित सवाल भी पूछे और शिक्षण पद्धति का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के बाद डीएम अतुल वत्स ने बताया कि उनका यहां आने का कोई निर्धारित कार्यक्रम नहीं था। उन्होंने कहा कि मैं बच्चों की वास्तविक शिक्षा व्यवस्था को नज़दीक से देखना चाहता था। यहां का माहौल बेहद सकारात्मक और प्रेरक लगाया उन्होंने शिक्षकों से भी बातचीत की और शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। डीएम का यह सहज, सरल और प्रेरणादायक व्यवहार बच्चों के लिए अविस्मरणीय रहा।

उनका कक्षा में जाकर बच्चों के साथ बैठना न केवल एक अनोखी पहल थी, बल्कि यह भी संदेश देता है कि बड़े पद पर बैठे लोग भी बच्चों के भविष्य और शिक्षा के प्रति कितने संवेदनशील हो सकते हैं। हाथरस में जिलाधिकारी की यह पहल निश्चित रूप से प्रेरणा देने वाली और सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

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