सादाबाद में आलू की खुदाई हुई शुरू,बदलते मौसम से घटी पैदावार, किसानों को सता रही नुकसान की आशंका

0
8

सादाबाद में आलू की खुदाई शुरू: बदलते मौसम से पैदावार घटी, किसानों को नुकसान की आशंका

सादाबाद में आलू की खुदाई ने रफ्तार पकड़ ली है। गांव-गांव खेतों में मजदूरों की टीमें लगाकर किसान फसल निकालने में जुटे हैं। हालांकि इस बार लाखों रुपये की लागत के बावजूद पैदावार में आई गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बदलते मौसम और लंबे समय तक पड़ी गलन भरी कड़ाके की सर्दी का सीधा असर कंद विकास पर पड़ा है। किसानों का अनुमान है कि प्रति बीघा औसतन 12 से 15 कट्टा तक उत्पादन कम हुआ है।

किसानों के अनुसार दिसंबर-जनवरी में करीब एक महीने तक पाला, घना कोहरा और तेज सर्दी का असर बना रहा। तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव और धूप की कमी से पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई। परिणामस्वरूप कंद कम बने और जो बने भी, वे अपेक्षित आकार नहीं ले पाए। कई खेतों में आलू का साइज छोटा रहने से ग्रेडिंग पर भी असर पड़ रहा है।

क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान 3797 किस्म का आलू बोते हैं, जो सामान्यतः बेहतर उत्पादन और बाजार मांग के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार यह किस्म भी मौसम की मार से नहीं बच सकी। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर प्रति बीघा लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में उत्पादन घटने से लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

मजदूरी दर बढ़ी, उर्वरक महंगे

किसान गंभीर सिंह, रामवीर सिंह, कर्मवीर ने बताया कि खुदाई के लिए मजदूरी दरों में भी वृद्धि हुई है। उर्वरक और कीटनाशकों के दाम पहले ही बढ़े हुए थे। अब पैदावार घटने से प्रति कट्टा लागत और अधिक बैठ रही है। किसानों का कहना है कि यदि बाजार भाव संतोषजनक नहीं रहे तो उन्हें नुकसान झेलना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय

आलू विशेषज्ञ मनोज चौधरी, विपिन चौधरी और विजेंद्र सिंह का कहना है कि लंबे समय तक अत्यधिक ठंड रहने से आलू की फसल में कंद विकास रुक जाता है।

तापमान सामान्य होने के बाद भी पौधे पूरी तरह रिकवर नहीं कर पाते, जिससे कंद के आकार और वजन पर असर पड़ता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here