सासनी की ग्राम पंचायत समामई रुहल में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल पर टीन शेड का किया गया निर्माण

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हाथरस जनपद में गोवंश संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी अतुल वत्स की दूरदर्शी सोच एक बार फिर मिसाल बनी है।
“वेस्ट टू वेल्थ” यानी कचरे से कंचन बनाने की उनकी मुहिम अब ज़मीन पर साफ़ नज़र आने लगी है।

सासनी विकासखंड की ग्राम पंचायत समामाई रूहल स्थित अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल पर एक मजबूत और विशाल शेड का निर्माण किया गया है।
इस शेड की खास बात यह है कि इसके निर्माण में हैंडपंपों की मरम्मत के बाद निकले लगभग 200 बेकार और निष्प्रयोज्य पाइपों का पुनः उपयोग किया गया है।
दरअसल, दिसंबर माह की मासिक अनुश्रवण बैठक में जिलाधिकारी अतुल वत्स ने सभी खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सरकारी धन की बचत और संसाधनों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए इन बेकार पाइपों का उपयोग गौशालाओं में किया जाए।
जिलाधिकारी के इस विज़न को सासनी के खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने सबसे पहले साकार कर दिखाया है।
करीब 55 फुट लंबे और 32 फुट चौड़े इस शेड ने न केवल अपनी मजबूती से सभी को प्रभावित किया है, बल्कि इससे लगभग 50 गोवंश को सर्दी, गर्मी और बरसात से स्थायी सुरक्षा भी मिल रही है।
इस नवाचार से सरकारी बजट की बड़ी बचत तो हुई ही है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है।
प्रशासन का प्रयास यहीं तक सीमित नहीं है।
जिलाधिकारी की मंशा के अनुरूप इस गौशाला को जन-आस्था के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है।
गौशाला परिसर में विशेष चबूतरा और हवन कुंड का निर्माण किया जा रहा है, जिससे आमजन का भावनात्मक जुड़ाव बढ़े।
अब क्षेत्रवासी अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य मांगलिक अवसर गौशाला में मना सकेंगे।
वैदिक रीति-रिवाजों से हवन कर लोग गोवंश सेवा के साथ दान पुण्य भी कर सकेंगे।
जिलाधिकारी अतुल वत्स की इस अभिनव पहल और सासनी ब्लॉक की त्वरित कार्यशैली की पूरे जनपद में सराहना हो रही है।
यह मॉडल भविष्य में अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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