न्यायालय की आदेशों की अवहेलना करने को लेकर न्यायालय सीजीएम ने अपनाया सख्त रुख, सादाबाद क्षेत्र अधिकारी के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के दिए आदेश

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हाथरस – न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को लेकर न्यायालय CJM ने अपनाया सख़्त रुख, क्षेत्राधिकारी सादाबाद के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के दिये आदेश।

 

वीओ- हाथरस के मुख्य दंडाधिकारी न्यायालय (CJM)ने थाना सादाबाद क्षेत्र के एक मामले में गंभीर टिप्पणी करते हुए संबंधित क्षेत्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।

मामला वाद संख्या 1396/2025 राहुल बनाम रंजीत से जुड़ा है, जो धारा 173(4) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत लंबित है। जिसमें कुछ पूर्व एक महिला की उसके ही पति के द्वारा इसलिए हत्या कर दी गई थी क्योंकि वो पति को छोड़ प्रेमी के साथ रह रही थी।

न्यायालय के अनुसार, दिनांक 14 अक्टूबर 2025 को संबंधित क्षेत्राधिकारी को उस मामले में प्रारंभिक जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद आख्या न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई। इसके बाद न्यायालय द्वारा कई बार अवसर दिए गए।

11 नवंबर, 21 नवंबर और 2 दिसंबर 2025 को भी आदेश पारित किए गए, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने न तो जांच रिपोर्ट दी और न ही कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।

18 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारी न्यायालय में उपस्थित तो हुए, लेकिन फिर भी आदेशों का पालन नहीं किया गया।

03 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, बावजूद इसके न तो जवाब दिया गया और न ही जांच आख्या दाखिल की गई।

न्यायालय ने इसे स्पष्ट रूप से आदेश की अवहेलना मानते हुए बेहद आपत्तिजनक करार दिया है।
न्यायालय मुख्य दंडाधिकारी (CJM)ने कहा कि यह कृत्य अधिकारी की घोर लापरवाही और न्यायालय की अवमानना को दर्शाता है।

अब न्यायालय ने आदेश दिया है कि संबंधित क्षेत्राधिकारी के विरुद्ध प्रकीर्ण वाद (Contempt Proceedings) अलग से दर्ज कर नोटिस जारी किया जाए। साथ ही, इस पूरे मामले की प्रति पुलिस अधीक्षक हाथरस को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया गया है कि वे स्वयं इस प्रकरण की प्रारंभिक जांच कर आख्या 28 जनवरी 2026 तक न्यायालय में प्रस्तुत करें।

फ़ा. वीओ – साफ है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। देखना होगा कि तय समय सीमा में जांच रिपोर्ट दाखिल होती है या फिर आगे और सख़्त कार्रवाई की जाती है।

बाईट — बृजमोहन राही — पीड़ित के अधिवक्ता

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